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UGC ने लागू किये पीएचडी के नए नियम, जानें क्या है इसमें आपके फायदे की चीज


नई दिल्ली. Education News: मास्टर डिग्री करने के बाद कई सारे कैंडिडेट ऐसे होते हैं जो पीएचडी करके अपना भविष्य और बेहतर बनाना चाहते हैं. जो कैंडिडेट पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए इससे संबंधित एक बहुत जरूरी सूचना यह है कि हाल ही में यूजीसी के द्वारा पीएचडी के नियमों में कुछ अहम बदलाव किये गए हैं. जिनमें कुछ आवश्यक शर्तों को जोड़ा गया है. इस कोर्स में यदि दाखिला लेने का मन बना रहे हैं तो इन नॉर्म्स को जानना अनिवार्य है. चलिए जानते हैं क्या है पीएचडी के लिए बड़े बदलाव.  

पीएचडी के समय में बदलावयूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की ओर से पीएचडी कोर्स को लेकर नई गाइडलाइन जारी की गई है. UGC के तय नियमों के अनुसार पीएचडी डिग्री कोर्स की अवधि कम से कम तीन साल की होगी. पीएचडी करने वाले कैंडिडेट को एडमिशन की तिथि से अधिकतम 6 साल का समय दिया जाएगा.

महिलाओं को लिए सुविधायूजीसी के चेयरमैन का कहना है कि यूजीसी के नए नियमों में स्टूडेंट्स कम उम्र में पीएचडी कोर्सेज में प्रवेश ले सकेंगे. महिला पीएचडी और दिव्यांग कैंडिडेट को 2 साल की छूट दी जाएगी. साथ ही किसी संस्थान में सेवारत कर्मचारी या टीचर पार्टटाइम पीएचडी कर सकेंगे.

अब ऐसे टीचर नहीं करा सकेंगे पीएचडीऐसे टीचर जिनकी सेवानिवृत्त उम्र सीमा तीन साल से कम बची है अब उन्हें अपने निरीक्षण में नए शोधार्थियों को लेने की अनुमति नहीं होगी लेकिन पहले से रजिस्टर्ड शोधार्थी का मार्गदर्शन जारी रहेगा.

PhD री रजिस्ट्रेशन के लिए नया नियमयूजीसी के नियमानुसार अगर कोई पीएचडी रिसर्चर रीरजिस्ट्रेशन कराता है तो उसे ऐसी स्थिति में अधिकतम दो साल का समय दिया जाएगा. लेकिन ये तब लागू होगा जब पीएचडी कार्यक्रम पूरा करने की कुल अवधि पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश की तिथि से आठ वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.  

नौकरी के साथ होगी पीएचडीअभी तक सरकारी सेवारत कर्मचारियों या शिक्षकों को शोध करने के लिए अपने विभाग से अध्ययन अवकाश लेना पड़ता था लेकिन नए नियम के तहत सेवारत कर्मचारी या शिक्षक भी पार्टटाइम पीएचडी कर सकेंगे.

शोध पत्र प्रकाशित करने की अनिवार्यता खत्मनए नियम के तहत अब ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग से पीएचडी नहीं की जा सकती. अब पीएचडी के नए नियमों में इसकी छूट दी गई है यानि रिसर्च की प्रक्रिया के दौरान दो रिसर्च पेपर छपवाने की अनिवार्यता पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है.

इन नियमों को भी जानेंनई EWS यानि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए प्रवेश के लिए 5% की रियायत दी गई है.UGC ने पीएचडी स्कॉलर किसी भी विषय के हों डॉक्टरेट की अवधि के दौरान अपने चुने हुए विषय से संबंधित -शिक्षा/शिक्षाशास्त्र/लेखन आदि के लिए अब स्कॉलर PHD कर सकते हैं.नए नियमों के तहत अब ज्वाइनिंग के बाद से ही प्रोफेसर स्टूडेंट्स को PHD का अध्ययन करवा सकेंगे.यूजीसी के नियमों में स्टूडेंट्स को पीएचडी के लिए गाईड उपलब्ध कराए जायेंगे.पीएचडी के नए नियमों में इसकी छूट दी गई है यानि रिसर्च की प्रक्रिया के दौरान दो रिसर्च पेपर छपवाने की अनिवार्यता पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है.

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